शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Tuesday, 12 November 2013
बुद्धिजीवी गए आटा पिसाने
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जयप्रकाश त्रिपाठी पांच हाथ के झिनड्ढे छप्पर की छांव में टूटी-फूटी जुलजुल कुर्सी पर फटे टायर की गद्दी, कुर्सी के तीन तरफ लटकती चीथड़ों क...
लैम्प
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व्सेवोलोद इवानोव की आत्मकथात्मक कहानी काफ़ी समय पहले की बात है – 1914 की लड़ाई तब शुरू भी नहीं हुई थी| साइबेरिया में इर्तिश नदी के किन...
Monday, 11 November 2013
'आज जैसे हालात में ही पैदा हुए थे हिटलर'
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हमारे पास देश और अंधी सियासत को देखने समझने का चश्मा नहीं है तो बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित प्रोफ़ेसर असमर बेग की यह टिप्पणी अवश...
Thursday, 7 November 2013
'सुई-नश्तर' के पाठकों की तलाश
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जयप्रकाश त्रिपाठी डमरू ने किताब लिख तो ली, छपवा भी ली, अब लोग उसे पढ़ेंगे कैसे, और उसके महान विचारों का पूरे दिग-दिगंत में हाहाकार कैसे ...
Wednesday, 6 November 2013
उस फोटो को देखा तो ऐसा लगा
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मधुमेह का मारा मैं आज सुबह मॉर्निंग वॉक की कठदौड़ से लौटा तो घर में अखबार की एक फोटो पर आंख ठहर गई। ठहर क्या चिपक-सी गई। टकटकी लगाए रहा ...
Monday, 4 November 2013
उन्हे नहीं सुहाते 'पछताते, पथ पर आते लोग'
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जयप्रकाश त्रिपाठी ये जो है न फेसबुक....जो रोज यहां आते हैं प्रायः, टिके रह जाते हैं घंटों। दिन-दिन भर। अपने आसपास से मुक्त। विचरते हुए...
नबीला एक दो दिनों में गांव लौट जाएगी
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ब्रजेश उपाध्याय इस हफ़्ते अमरीका ने दो नए चेहरे देखे. एक वो चेहरा जो अपने दफ़्तर में बैठ कर हज़ारों मील दूर छिपे चरमपंथियों पर निशाना ...
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