शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Monday, 11 November 2013

'आज जैसे हालात में ही पैदा हुए थे हिटलर'

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हमारे पास देश और अंधी सियासत को देखने समझने का चश्मा नहीं है तो बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित प्रोफ़ेसर असमर बेग की यह टिप्पणी अवश...
Thursday, 7 November 2013

'सुई-नश्तर' के पाठकों की तलाश

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जयप्रकाश त्रिपाठी डमरू ने किताब लिख तो ली, छपवा भी ली, अब लोग उसे पढ़ेंगे कैसे, और उसके महान विचारों का पूरे दिग-दिगंत में हाहाकार कैसे ...
Wednesday, 6 November 2013

उस फोटो को देखा तो ऐसा लगा

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मधुमेह का मारा मैं आज सुबह मॉर्निंग वॉक की कठदौड़ से लौटा तो घर में अखबार की एक फोटो पर आंख ठहर गई। ठहर क्या चिपक-सी गई। टकटकी लगाए रहा ...
Monday, 4 November 2013

उन्हे नहीं सुहाते 'पछताते, पथ पर आते लोग'

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जयप्रकाश त्रिपाठी ये जो है न फेसबुक....जो रोज यहां आते हैं प्रायः, टिके रह जाते हैं घंटों। दिन-दिन भर। अपने आसपास से मुक्त। विचरते हुए...

नबीला एक दो दिनों में गांव लौट जाएगी

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ब्रजेश उपाध्याय इस हफ़्ते अमरीका ने दो नए चेहरे देखे. एक वो चेहरा जो अपने दफ़्तर में बैठ कर हज़ारों मील दूर छिपे चरमपंथियों पर निशाना ...

अमरीकी जासूसों के निशाने पर पूरी दुनिया

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रूसी संसद के निचले सदन, राजकीय दूमा की अंतर्राष्ट्रीय संबंध समिती के अध्यक्ष अलेक्सेय पुश्कोव ने अपने ट्विटर माइक्रोब्लॉग में लिखा है कि...
Friday, 1 November 2013

काशीनाथ सिंह की तीन 'काल' कथाएं

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अकाल यह वाकया दुद्धी तहसील के एक परिवार का है। पिछले रोज चार दिनों से गायब मर्द पिनपिनाया हुआ घर आता है और दरवाजे से आवाज देता है। अ...
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