शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Thursday, 25 July 2013
लेव तोल्सतोय की कहानी कितनी जमीन?
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(प्रेमचंद के शब्दों में पूरी तरह देसी पात्रों और हिंदी पठनीयता की शब्दावलियों से पिरोयी गई यह कहानी पाठकों के लिए सुप्रचलित है) दो बहने...
मक्सिम गोर्की की कहानी वह लड़का
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यह छोटी-सी कहानी सुनाना काफी कठिन होगा-इतनी सीधी-सादी है यह! जब मैं अभी छोटा ही था, तो गरमियों और वसन्त के दिनों में रविवार को, अपनी गली क...
अंतोन चेखव की कहानी कमजोर
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आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूल्या वसिल्येव्ना का हिसाब चुकता करना चाहता था। "बैठ जाओ यूल्या वसिल्येव्ना।" मैंने उससे कहा, ...
दाता और दाता
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इवान तुर्गनेव मैं सड़क के किनारे-किनारे जा रहा था कि एक बूढ़े मुझे टोका। लाल सुर्ख़ और आँसुओं में डूबी आँखें , नीले होंठ , गंदे हाथ और ...
Wednesday, 24 July 2013
अनोखा रोमांस / अन्तोन चेख़व
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संगीतकार स्मिसकोव नगर से राजकुमार बिबुलोव के महल को जा रहा था, जहाँ एक सगाई के उपलक्ष्य में शाम को संगीत और नृत्य का कार्यक्रम रखा गया थ...
लज्जा और तस्लीमा नसरीन
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लज्जा’ बांग्लादेश की बहुचर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन का पाँचवाँ उपन्यास है। इस उपन्यास ने न केवल बांग्लादेश में हलचल मचा दी है, बल्कि भार...
ताबूतसाज
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अलेक्सान्दर पूश्किन की कहानी ताबूतसाज आद्रियान प्रोखोरोव के घरेलू सामान की आखिरी चीजें भी गाड़ी पर लद गयीं मे जुते मरियल घोड़ों की जोड़...
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