शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 23 July 2013

हिंदुस्तान से एक खत : इंतिज़ार हुसैन

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( अनुवाद - नन्द किशोर विक्रम ) अंजींज-अंज-जान (जान से प्यारे) सआदतो-ए-इकबाल के निशान (सौभाग्य व प्रताप के प्रतीक) बरंखुर्दार कामरान ...

अनबूझ अनुवाद

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स्वतंत्र मिश्र हिंदी अनुवाद का काम आजकल बड़े पैमाने पर हो रहा है , लेकिन इसका स्तर अक्सर बेहद खराब होता है. ‘प्रकाशक प्रति शब्द 10 ...

नाखून क्यों बढ़ते हैं? : हजारी प्रसाद द्विवेदी

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बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देने वाले प्रश्न कर बैठते हैं। अल्पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है। मेरी लड़की ने उस दिन पूछ लिया कि नाखून क...

इवान तुर्गनेव की कहानी

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प्रेम शिकार से लौटते हुए मैं बगीचे के मध्य बने रास्ते पर चला जा रहा था , मेरा कुत्ता मुझसे आगे-आगे दौड़ा जा रहा था। अचानक उसने चौंकक...

अंतोनियो ग्राम्शी और उसका सांस्कृतिक आधिपत्यवाद : ओमप्रकाश कश्यप

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यह एक विचित्र संयोग है कि यूरोप के बौद्धिक जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले इटली के अधिकांश विद्वानों ने अपने जीवन का लंबा और महत्त्व...
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