शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 23 July 2013

ज्यां पाल सार्त्र का आत्म और अनात्म : कृष्ण किशोर

›
ज्यां पाल सार्त्र (1905-1980) समय के हाथ आया हुआ विडम्बनाओं का ऐसा गोलक थे जो घटनाओं के दबाव में खुलता और बंद होता रहा। इसी प्रक्रिया मे...
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.