शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 20 July 2013

परमात्मा का कुत्ता

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  मोहन राकेश  बहुत-से लोग यहाँ-वहाँ सिर लटकाए बैठे थे जैसे किसी का मातम करने आए हों। कुछ लोग अपनी पोटलियाँ खोलकर खाना खा रहे थे। दो-...

चालीस के बाद प्रेम

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 रघुवीर सहाय  श्‍यामलाल एक क्षण ठिठके , फिर नाले में उतर पड़े। नाले में कीचड़ नहीं था ; उसमें सूखी पत्तियाँ , अद्धे , गुम्‍मे , चीथड...
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