शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Thursday, 18 July 2013
स्वच्छंदतावादी रूसी लेखक अलेक्सांद्र ग्रीन
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स्वच्छंदतावादी रुसी लेखक अलेक्सांद्र ग्रीन ने साहित्य की दुनिया में उन्होंने प्रवेश किया ही था कि उनके नाम के साथ अनेक किंवदतियाँ जुड़ गईं|...
येफ्रेमोव की विज्ञान-कथाएं और भविष्यवाणियां
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योगेन्द्र नागपाल बीसवीं सदी में विज्ञान ने अकल्पनीय उन्नति की| इसके साथ ही साहित्य में विज्ञान-कथा नाम की एक नई विधा का विकास हुआ| विज्ञ...
संस्कृति के चार अध्याय
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रामधारी सिंह दिनकर संस्कृति के चार अध्याय महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक बहुचर्चित पुस्तक है जिसे साहित्य अकादमी ने सन् १९५६ में न केवल...
सदी के पहले दशक में हिंदी बालसाहित्य
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ओमप्रकाश कश्यप स्मृति अंतराल अधिक नहीं है। सब कुछ जैसे हमारी आंखों के सामने हो। इकीसवीं शताब्दी का स्वागत लोगों ने पूरे हर्षोल्लास के सा...
शाश्वतोऽयं : प्रभाकर श्रोत्रिय
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रमेश दवे महाभारत एक क्लासिक रचना है। उसमें से अनेक कथाएं जन्म लेती हैं जो अपने समय, अपनी नियति, अपने मनोराग और अपने परिवेश को मूल कथाओं ...
एक रचना नगर का क्लासिक अभियान
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शिव प्रसाद जोशी वाइमर जर्मनी का ऐसा शहर जहां कलाकार, साहित्यकार खींचे चले आए और इस शहर के जादू में उलझे रह गए. पिछले दस सालों में शहर अप...
क्लासिक साहित्य
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विनीत उत्पल हिन्दी साहित्य बहुत ही विषमकारी दौर से गुजर रहा है। कालजयी रचनाएं ढूंढ़े नहीं मिल रही हैं। कोई भी लेखक बेस्ट सेलर होने का दा...
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