शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Monday, 8 July 2013
गिरगिट
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अन्तोन चेख़व पुलिस का दारोगा ओचुमेलोव नया ओवरकोट पहने, बगल में एक बण्डल दबाये बाजार के चौक से गुजर रहा था। उसके पीछे-पीछे लाल बालोंवाला ...
ख़लील जिब्रान को हिन्दी में पढ़ने का सुख
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प्रदीप मोघे लघुकथा के क्षेत्र में लम्बे समय से सक्रिय हिन्दी के सुपरिचित लेखक सुकेश साहनी द्वारा संकलित एवं अनूदित ‘खलील जिब्रान की लघुक...
विश्वकवि कालिदास
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डॉ.ओम जोशी विश्वकवि कालिदास विश्व साहित्यकारों में आज भी शीर्षस्थ है, सर्वोच्च हैं, सर्वोत्तम हैं। उनकी समस्त संस्कृत रचनाएँ निश्चित ही ...
श्रीनारायण चतुर्वेदी का साहित्य
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श्रीनारायण चतुर्वेदी ने अपनी कवितायें ‘श्रीवर’ नाम से लिखकर दो कविता संग्रह तैयार किये हैं 1-रत्नदीप तथा 2-जीवन कण। इनके द्वारा अंग्रेजी भ...
एक पाठक
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मक्सिम गोर्की अनुवाद : अनिल जनविजय रात काफी हो गया थी जब मैं उस घर से विदा हुआ जहाँ मित्रों की एक गोष्ठी में अपनी प्रकाशित कहानियों मे...
ग़ालिब छुटी शराब
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रवीन्द्र कालिया 13 अप्रैल 1997। बैसाखी का पर्व। पिछले चालीस बरसों से बैसाखी मनाता आ रहा था। वैसे तो हर शब बैसाखी की शब होती थी, मगर तेरह...
स्टीफन स्वाइग की आत्मकथा (5-अंतिम)
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ओमा शर्मा फ्रायड का साथ और वे स्याह दिन माहौल कितना ही गमगीन हो, किसी बडे शख्स से उदात्त नैतिक फलक पर बात करने से दिल को सुकून मिलता ह...
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