शब्द
शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी
Sunday, 7 July 2013
एक अंक 'हरिगंधा' का
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संपादक डा. मुक्ता 'हरिगंधा' साहित्य की महत्त्वपूर्ण पत्रिका है। इसका एक लघुकथा विशेषांक है। अतिथि संपादक अशोक भाटिया ने अपने अप...
आनेवाली पीढ़ी के नाम – बर्तोल्त ब्रेख्त
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1. सचमुच मैं अँधिआरे दौर में जी रहा हूँ! सीधी-सच्ची बात करना बेवकूफी है. बेशिकन माथा निशानी है पत्थर दिल होने की. वह जो हँस रहा है ...
जब किताबों की होली जली
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बर्तोल्त ब्रेख्त जब सरकार ने आदेश दिया कि हानिकारक ज्ञान वाली किताबें जलाई जाएँगी सार्वजानिक रूप से और हर तरफ़ हाँका गया बैलों को खीं...
मरीना स्विताएवा की कविताएं
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रूसी कवि ब्लोक के लिए तुम्हारा नाम जैसे हाथ पर बैठी चिड़िया, तुम्हारा नाम जैसे जीभ पर बर्फ़ की डली होठों का हल्का-सा कम्पन। तीन अ...
Saturday, 6 July 2013
फ़ज़ल इमाम मल्लिक की कलम से ढेर सारी बातें किताबों की
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किताबों की भीड़ में कुछ और किताबें : देवेंद्र कुमार मिश्र को पिछले कुछ सालों से जानता हूँ। ज़ाहिर है इसकी वजह सनद ही रही है। सनद के लिए अ...
भारतीय पत्रकारिता, मुद्दे और अपेक्षाएँ
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सुरेश कुमार पंडा विषय शुष्कता का सीमोलँघन कर इतिहास और वर्तमान की बहुचर्चित, बहु प्रचारित घटनाओं को सरस ढंग से प्रस्तुतकर पाठक को आकर्षण...
आधुनिकतावाद की लहरों में अथाह साहित्यिक संपदा
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सोलोमन आर. गुगेन्हीम म्यूज़ियम होफ्मन केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कला शिक्षक के रूप में भी मशहूर थे, और वे अपने स्वदेश जर्...
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