शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 2 July 2013

जुझारू पृष्ठों पर ‘आशा भरे अवसाद’

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प्रणय कृष्ण नेरुदा की कविताओं के अबतक के सबसे बेहतर अनुवाद हिंदी में लानेवाले कवि नीलाभ ने नेरुदा की लम्बी कविता ‘वह लकड़हारा जागे’ के ब...

मैं ईशान, गुल्लू और एक सतरंगी

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रमेश तैलंग सैंकड़ों बहुरंगी बाल पुस्तकों ने हिंदी बाल-साहित्य को अपनी नव्यता एवं भव्यता के साथ समृद्ध किया है। चाहे विषयों की विविधता ह...

शहीद भगतसिंह की गलत छवि पेश करने की साजिश

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सुधीर सुमन मुख्यधारा का हिंदी सिनेमा प्रायः शासकवर्ग की संस्कृति और विचारधारा का   ही प्रचार-प्रसार करता है, अपनी व्यावसायिक बाध्यताओं क...

शब्दों का विश्वबैंक रच रहे कोशकार अरविंद कुमार

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आधुनिक काल में हिन्‍दी के पहले शब्‍दकोश ‘समांतर कोश’(1996), ‘द हिंदी-इंग्लिश इंग्लिश-हिंदी थिसारस ऐंड डिक्शनरी’(2007) जैसे महाग्रंथ और ‘अ...
Monday, 1 July 2013

बांग्ला साहित्य जगत

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कांचनमाला पुरातन बांग्ला की उपलब्ध रचनाओं में हरप्रसाद शास्त्री के 47 चर्यापद विशेष महत्व रखते हैं। ये प्राय: आठ पंक्तियों के रहस्यमय गी...
1 comment:

मराठी साहित्य

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मराठी भाषा में लिखी कृतियों का भंडार उपलब्ध है। बांग्ला के साथ मराठी भारतीय-आर्य साहित्य में सबसे पुराना क्षेत्रीय साहित्य है, जिसका क...

अँधेरे बंद कमरे -मोहन राकेश

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अँधेरे बंद कमरे प्रसिद्ध साहित्यकार, उपन्यासकार और नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1 जनवरी, 2003 को 'राजकमल प्...
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