शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 22 June 2013

इंट्रोवर्ट हैं तो खुद को बिल्कुल न बदलें!

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स्पीकर सुजेन केन प्रोफाइल : लेखक बनने से पहले 7 साल जेपी मॉर्गन और जनरल इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियों की कंसल्टेंट थीं। क्यों पढ़ें: इसे अब ...

(दूसरा दशक के पोस्टर से साभार/प्राइमरी का मास्टर)

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किताबों के संग अपने कलाम साहब की पुस्तकों के बारे में चंद  लाइने ! आधी सदी से अधिक का वक्त मैंने बिताया किताबों के संग किताब मेरी दोस्...

अनामदास का पोथा उर्फ ऎसी किताबें क्या पढ़ना?

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अशोक कुमार पांडेय पुरानी किताबें पुराने दोस्तों की तरह होती हैं. अगर दिल के करीब हों तो हाथ मिलाते ही दुनिया-जहान की बातें निकल आती हैं ...

किताबें इधर-उधर की

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पशुपति: राजश्री - राजश्री इस उपन्यास की पृष्ठभूमि सांस्कृतिक है। वक्त वैदिक काल का और संघर्ष महाअसुर वरुण और महारूद शिव के बीच। दो ध्रुवों...
Thursday, 20 June 2013

‘वह भी कोई देस है महाराज’

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किताबों की बहुरंगी दुनिया में एक किताब है-वह भी कोई देस है महाराज। अनिल यादव की यह किताब पूर्वोत्तर राज्यों के जीवन, जंगल, वहां की पीड़ा ए...

किताबों की बात जो पढ़े उसका भी भला, जो न पढ़े उसका भी

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सुधा अरोड़ा की प्रिय किताबें प्रसिद्ध कथाकार सुधा अरोड़ा कहती हैं कि मुझे सबसे अधिक संस्मरण और डायरी पसंद हैं. सीमोन द बोउवार की किताब सेक...

किताबों के लिए पागल मन

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राजी सेठ की प्रिय किताबें मुझे उन किताबों से लगाव रहा है जिनमें लेखक का मन खुलता है और कुछ अनौपचारिक बातें सामने आती हैं। 'लेटर्स टू अ...
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