शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Wednesday, 19 June 2013

क्या आपने ये किताबें पढ़ी हैं? नहीं, तो अब पढ़ लीज‌िए न

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गबन - प्रेमचंद कितने पाकिस्तान - कमलेश्वर मां - गोर्की तमस - भीष्म साहनी किसान - बॉलजाक युद्ध और शांति - लेव तोलस्तोय टोबा टेक सिंह -...

पहले सोपान पर बस इतना ही

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कोई पश्चाताप नहीं है, यहां तक, इस तरह पहुंचने का। न आगे के सफर के लिए। स्वयं में हर व्यक्ति एक अलग तरह की पठनीयता से पूर्ण उपन्यास होता है...
Tuesday, 18 June 2013

शीशों के अजायब घर

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विंब अस्वीकार होने दीजिए अब, आईने के पार होने दीजिए अब। बहुत घबराने लगा है मन, जिया जाता नहीं यह भीड़-भीतर का अजनबीपन, एक को दो-चार ह...
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