शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Tuesday, 18 June 2013

शीशों के अजायब घर

›
विंब अस्वीकार होने दीजिए अब, आईने के पार होने दीजिए अब। बहुत घबराने लगा है मन, जिया जाता नहीं यह भीड़-भीतर का अजनबीपन, एक को दो-चार ह...
3 comments:
‹
Home
View web version
Powered by Blogger.