शब्द

शब्द आओ मेरे पास,जो बुलायें, जाओ उनके पास भी

Saturday, 25 April 2015

जीवन की गति जाने कौन...राहे सीधी सीधी और टेढ़ी-मेढ़ी चाल

चलना ही जिंदगी है, चलता ही जा रहा हूं.....................

जयप्रकाश त्रिपाठी at 18:54 No comments:
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